उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में एक लाख पेड़ कटाई का आरोप, 166 लोगों पर गिरफ्तारी की तैयारी

धमतरी के जंगलों में बड़ा विवाद, वन विभाग बनाम ग्रामीण आमने-सामने

धमतरी । उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में कथित तौर पर लाखों पेड़ों की कटाई और वन भूमि पर अवैध कब्जे का मामला अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। वन विभाग ने इस मामले में 166 लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज कर कार्रवाई तेज कर दी है, जबकि ग्रामीण खुद को निर्दोष बताते हुए इसे पुश्तैनी खेती की जमीन का मामला बता रहे हैं।

धमतरी जिला मुख्यालय से करीब 95 किलोमीटर दूर स्थित इस टाइगर रिजर्व क्षेत्र में पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी और जंगलों की कटाई के आरोपों ने प्रशासन और ग्रामीणों को आमने-सामने ला खड़ा किया है।

जंगलों में मिले कटाई और कब्जे के निशान

जैतपुर गांव और आसपास के क्षेत्रों में मौके पर देखने पर कई जगहों पर जंगल साफ कर खेतीनुमा जमीन तैयार किए जाने के संकेत मिले। कुछ स्थानों पर पेड़ों के ठूंठ, जली हुई लकड़ियां और साफ की गई भूमि दिखाई दी।

वन विभाग का दावा है कि इन इलाकों में बड़े पैमाने पर जंगल काटकर खेती और कब्जा किया गया है।

ग्रामीण बोले – “हम पीढ़ियों से यहां खेती कर रहे”

ग्रामीणों ने वन विभाग के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि वे वर्षों नहीं बल्कि पीढ़ियों से इन जमीनों पर खेती करते आ रहे हैं और यही उनकी जीविका का मुख्य साधन है।

ग्रामीणों का आरोप है कि बिना ठोस प्रमाण के उन्हें आरोपी बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि जंगलों में इतनी बड़ी कटाई हुई होती, तो लगातार तैनात वन अमला और सुरक्षा गार्डों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?

ग्रामीणों ने खुद को “प्रकृति प्रेमी” बताते हुए कहा कि उन्होंने जंगल को नुकसान नहीं पहुंचाया।

वन विभाग का बड़ा दावा – “एक लाख से ज्यादा पेड़ों को नुकसान”

वन विभाग इस मामले में अपने दावों पर कायम है। विभाग के अनुसार ISRO CARTOSAT सैटेलाइट इमेजरी, गूगल अर्थ आधारित रिमोट सेंसिंग और डिजिटल मैपिंग के जरिए पूरे क्षेत्र का विश्लेषण किया गया।

वन विभाग के मुताबिक:

वर्ष 2008 से 2022 के बीच जंगलों की कटाई बढ़ी

2011 तक करीब 45 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित था

बाद में यह बढ़कर 106 हेक्टेयर तक पहुंच गया

एक लाख से ज्यादा पेड़ों को नुकसान पहुंचाया गया

उपनिदेशक वरुण जैन के अनुसार हाल ही में:

574 पेड़ों को घेरकर सुखाया गया

237 पेड़ काटे गए

कई जगहों पर ठूंठ जलाने के प्रमाण मिले

166 लोगों पर दर्ज केस, गिरफ्तारी की तैयारी

इस पूरे मामले में 166 लोगों के खिलाफ

Wildlife Protection Act 1972

Indian Forest Act 1927

के तहत अपराध दर्ज किए गए हैं।

धमतरी जिला एवं सत्र न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत खारिज किए जाने के बाद अब गिरफ्तारी की कार्रवाई का रास्ता साफ माना जा रहा है।

कई गांवों से हटाया गया कब्जा

वन विभाग का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पहले भी कई गांवों से वन भूमि को कब्जामुक्त कराया जा चुका है। इनमें:

घोरागांव

सोरमाल

बुढ़गेलटप्पा

बनवापार

गरीबा

कोकड़ी

गोना

कांडसर

फरसरा

पीपलखुटा

करलाझर

जैसे इलाके शामिल हैं।

विभाग के अनुसार लगभग 850 हेक्टेयर वन भूमि मुक्त कराई गई, जिसकी अनुमानित कीमत 510 करोड़ रुपये आंकी गई।

सबसे बड़ा सवाल – अतिक्रमण या जमीन अधिकार?

पूरा मामला अब अदालत में है। एक तरफ वन विभाग डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर बड़े पैमाने पर वन कटाई और कब्जे का दावा कर रहा है, तो दूसरी ओर ग्रामीण इसे अपने पुश्तैनी अधिकारों और जीविका से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं।

अब यह तय अदालत करेगी कि:

क्या वास्तव में संगठित तरीके से जंगल काटे गए?

या यह पीढ़ियों से रह रहे ग्रामीणों और वन विभाग के बीच जमीन अधिकारों का विवाद है?

जंगल पुनर्जीवन की तैयारी

वन विभाग ने प्रभावित 106 हेक्टेयर क्षेत्र में:

50 हजार कंटूर ट्रेंच

कंटूर बंड निर्माण

बड़े पैमाने पर पौधरोपण

की योजना शुरू कर दी है, ताकि जंगल को दोबारा विकसित किया जा सके।

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