महासमुंद में LPG घोटाले का बड़ा खुलासा

90 टन गैस गायब, खाद्य विभाग के अधिकारी और गैस एजेंसी संचालक गिरफ्तार

महासमुंद। महासमुंद में करोड़ों रुपये के एलपीजी गैस घोटाले का सनसनीखेज मामला सामने आया है। लगभग 90 मीट्रिक टन एलपीजी गैस की कथित चोरी और कालाबाजारी ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मामले में जिला खाद्य अधिकारी, सहायक खाद्य अधिकारी और गैस एजेंसी संचालक समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है।

पुलिस कार्रवाई में जिला खाद्य अधिकारी अजय कुमार यादव, सहायक खाद्य अधिकारी मनीष कुमार यादव और गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर को गिरफ्तार किया गया है। वहीं ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के संचालक संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस लगातार उनकी तलाश में दबिश दे रही है।

कैसे सामने आया पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार दिसंबर 2025 में सिंघोड़ा थाना पुलिस ने छह एलपीजी से भरे कैप्सूल ट्रकों को अधूरे दस्तावेजों के आधार पर जब्त किया था। बाद में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए 30 मार्च 2026 को जिला प्रशासन ने इन ट्रकों को ग्राम उरला स्थित ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स प्लांट में शिफ्ट करने की अनुमति दी।

बताया जा रहा है कि ट्रकों को प्लांट पहुंचाने के दौरान कहीं भी वजन नहीं कराया गया, जबकि पूरे रास्ते में कई धर्मकांटे मौजूद थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि यही लापरवाही आगे चलकर बड़े घोटाले की वजह बनी।

रात के अंधेरे में गैस की कालाबाजारी

प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि प्लांट परिसर के पास खड़े ट्रकों से गैस को बड़े बुलेट टैंकों में ट्रांसफर किया जाता था। बाद में उसी गैस को निजी टैंकरों और सिलेंडरों में भरकर रायपुर समेत कई इलाकों में सप्लाई किया गया।

बिना वैध बिल के केवल कच्चे चालानों के जरिए 4 से 6 टन तक गैस भेजी जाती रही। रिकॉर्ड जांच में पता चला कि अप्रैल महीने में कंपनी ने केवल 47 टन गैस खरीदी थी, लेकिन बिक्री रजिस्टर में 107 टन बिक्री दिखाई गई। यानी करीब 60 टन गैस बिना खरीद रिकॉर्ड के बाजार में पहुंच गई।

पुलिस जांच में मिले बड़े सबूत

पुलिस ने GPS डेटा, बैंक ट्रांजेक्शन, परिवहन रिकॉर्ड, कंप्यूटर डेटा और स्टॉक रजिस्टर की जांच के बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा किया। अब तक:

7 एलपीजी टैंकर जब्त

4 बड़े बुलेट टैंक सीज

लगभग 100 गैस सिलेंडर बरामद

DVR, कंप्यूटर और दस्तावेज कब्जे में

कंपनी कर्मचारी निखिल वैष्णव की गिरफ्तारी के बाद जांच खाद्य विभाग के अधिकारियों तक पहुंची।

सबूत मिटाने की भी कोशिश

जांच एजेंसियों का दावा है कि कई महत्वपूर्ण रजिस्टर और दस्तावेज गायब किए गए। बिना बिल वाले रिकॉर्ड हटाने और एंट्री रजिस्टर नष्ट करने की कोशिश भी सामने आई है। पुलिस अब आरोपियों पर अतिरिक्त धाराएं लगाने की तैयारी कर रही है।

प्रशासनिक सिस्टम पर बड़े सवाल

यह मामला सिर्फ गैस चोरी तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि खाद्य विभाग की निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटे दुकानदारों पर सख्ती दिखाने वाला विभाग अब खुद बड़े घोटाले में घिर गया है।

महासमुंद पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। प्रदेश में यह मामला अब सबसे बड़े आर्थिक और प्रशासनिक घोटालों में गिना जा रहा है।

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