नगरी – धमतरी। जब जिम्मेदारियां बढ़ती हैं, महंगाई आसमान छूती है और परिवार की जरूरतें हर दिन नई चुनौतियां लेकर सामने आती हैं, तब एक सरकारी कर्मचारी के मन में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है—क्या उसकी मेहनत का उचित मूल्य मिल रहा है?
इन्हीं सवालों और उम्मीदों के बीच अब आठवें वेतन आयोग को लेकर छत्तीसगढ़ से एक मजबूत और संवेदनशील पहल सामने आई है। प्रदेश के सबसे बड़े कर्मचारी संगठन, छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने आयोग को ऐसे सुझाव भेजे हैं, जो केवल वेतन बढ़ाने की मांग नहीं, बल्कि कर्मचारियों के सम्मानजनक जीवन, सामाजिक सुरक्षा और भविष्य की स्थिरता की मांग को भी दर्शाते हैं।
केंद्र सरकार द्वारा प्रत्येक दस वर्षों में वेतन आयोग का गठन किया जाता है, ताकि कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों की समीक्षा की जा सके। इसी क्रम में नवंबर 2025 में आठवें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन किया गया, जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रसाद देसाई कर रही हैं। आयोग द्वारा जनवरी 2026 से नई सिफारिशें लागू किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
आयोग ने देशभर के कर्मचारी संगठनों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। इसी प्रक्रिया के तहत छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन, जो प्रदेश के 134 संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है, ने अपने व्यापक सुझाव आयोग को भेजे हैं।
महंगाई के दौर में न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग
फेडरेशन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आज की महंगाई में वर्तमान वेतन संरचना कर्मचारियों के जीवन स्तर को बनाए रखने में पर्याप्त नहीं है।
इसी को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम वेतन ₹30,000 से बढ़ाकर ₹32,500 प्रतिमाह करने की मांग की गई है।
साथ ही फिटमेंट फैक्टर 3.68 करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि कर्मचारियों की आय वास्तविक खर्चों के अनुरूप हो सके।
वेतन संरचना में सुधार से मिलेगा स्थायित्व
फेडरेशन ने वेतन प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाने की जरूरत पर जोर दिया है।
Pay Matrix को आसान बनाने, वार्षिक वेतनवृद्धि को 3% से बढ़ाकर 5% करने और कर्मचारियों को 8, 16, 24 तथा 32 वर्षों की सेवा पर समयबद्ध पदोन्नति देने की मांग की गई है।
यह केवल आर्थिक सुधार नहीं, बल्कि कर्मचारियों के आत्मसम्मान और कार्य प्रेरणा को बढ़ाने का प्रयास भी है।
महंगाई भत्ता और वास्तविकता का संतुलन
महंगाई भत्ता (DA) को लेकर भी फेडरेशन ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
प्रस्ताव है कि जब DA 50% तक पहुंच जाए, तो उसे मूल वेतन में समाहित कर दिया जाए।
इसके साथ ही AICPI के आधार वर्ष को अद्यतन करने की मांग भी की गई है, ताकि महंगाई का सही आंकलन हो सके।
छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में बढ़ती महंगाई को देखते हुए विशेष भत्ता देने की मांग यह दर्शाती है कि क्षेत्रीय परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
गृह भाड़ा भत्ता बढ़ाने से मिलेगी राहत
शहरी क्षेत्रों में बढ़ते किराए के बीच कर्मचारियों को राहत देने के लिए HRA में बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया है।
मौजूदा दरों 30%, 20% और 10% को बढ़ाकर 40%, 30% और 20% करने की मांग की गई है।
इसके अलावा रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग-भिलाई को X श्रेणी में शामिल करने का प्रस्ताव, शहरों की वास्तविक लागत के अनुरूप निर्णय लेने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
स्वास्थ्य और शिक्षा पर विशेष ध्यान
फेडरेशन ने कर्मचारियों और उनके परिवारों के स्वास्थ्य और बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देने की मांग की है।
कैशलेस मेडिकल सुविधा लागू करने, चिकित्सा भत्ता ₹3000 प्रतिमाह करने और बच्चों की शिक्षा के लिए ₹4500 प्रतिमाह प्रति बच्चा देने का प्रस्ताव रखा गया है।
यह पहल इस बात का संकेत है कि कर्मचारी केवल वेतन ही नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और संतुलित जीवन की भी अपेक्षा रखते हैं।
पुरानी पेंशन बहाली—सबसे बड़ी उम्मीद
इन सभी मांगों में सबसे भावनात्मक और महत्वपूर्ण मांग है—पुरानी पेंशन योजना की बहाली।
फेडरेशन ने NPS और UPS को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग की है, जिसमें सेवानिवृत्ति के बाद अंतिम वेतन का 50% + DA पेंशन के रूप में मिले।
इसके साथ ही पारिवारिक पेंशन 50% करने और ग्रेच्युटी की सीमा ₹30 लाख करने का प्रस्ताव भी शामिल है।
यह मांग केवल आर्थिक सुरक्षा नहीं, बल्कि कर्मचारियों के भविष्य की चिंता और उनके परिवारों की स्थिरता से जुड़ी हुई है।
छत्तीसगढ़ के लिए विशेष मांगें
फेडरेशन ने राज्य के कर्मचारियों के लिए कुछ विशेष मांगें भी रखी हैं, जिनमें केंद्र के समान DA, भर्ती और वेतनमान में समानता, संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण और बस्तर-सरगुजा जैसे क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों को 25% विशेष भत्ता शामिल है।
यह मांगें राज्य के दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों की कठिन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए की गई हैं।
कार्य-जीवन संतुलन की ओर एक कदम
फेडरेशन ने 5 दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने, महिला कर्मचारियों के लिए चाइल्ड केयर लीव 1000 दिन करने और सभी विभागों में समयबद्ध कैडर रिव्यू कराने का सुझाव दिया है।
यह पहल कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक जीवन और कार्य संतुलन को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अंतिम संदेश:
फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा और ब्लॉक संयोजक डोमार सिंह ध्रुव का कहना है कि यदि इन सुझावों पर सकारात्मक और संवेदनशील दृष्टिकोण से विचार किया जाता है, तो यह न केवल कर्मचारियों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाएगा, बल्कि उन्हें और अधिक समर्पण और निष्ठा के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा।
आठवां वेतन आयोग केवल वेतन बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि लाखों कर्मचारियों की उम्मीदों, उनके संघर्षों और उनके भविष्य का आईना है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन मांगों को आयोग किस रूप में स्वीकार करता है और क्या कर्मचारियों की यह उम्मीदें हकीकत बन पाती हैं।
