112 वन ग्रामों में एग्रीस्टेक का संकट! रिकॉर्ड की गड़बड़ी से हजारों किसानों की बढ़ी चिंता

नगरी। धमतरी जिले के वनांचल क्षेत्र में इन दिनों किसानों की एक बड़ी समस्या सामने आ रही है। क्षेत्र के 112 वन ग्रामों के किसान एग्रीस्टेक पोर्टल में नाम दर्ज नहीं होने और भूमि अभिलेखों में कथित त्रुटियों के कारण परेशान हैं। किसानों का कहना है कि शासन द्वारा किसानों को योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए डिजिटल व्यवस्था लागू की गई है, लेकिन रिकॉर्ड में गड़बड़ियों के कारण उन्हें ही सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

बताया जा रहा है कि नगरी विकासखंड के वन ग्रामों में रहने वाले अनेक किसान लंबे समय से खेती-किसानी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते आ रहे हैं। लेकिन हाल के दिनों में जब किसानों ने एग्रीस्टेक पोर्टल में अपना विवरण जांचना शुरू किया, तब कई किसानों को पता चला कि उनकी भूमि का रिकॉर्ड सही तरीके से दर्ज नहीं है। कहीं रकबा में त्रुटि है तो कहीं खसरा संबंधी जानकारी अपडेट नहीं दिखाई दे रही। किसानों का आरोप है कि इन्हीं त्रुटियों के कारण उनका नाम एग्रीस्टेक से नहीं जुड़ पा रहा है।

किसानों का कहना है कि एग्रीस्टेक में नाम नहीं होने का सबसे बड़ा असर खाद, बीज और कृषि ऋण जैसी सुविधाओं पर पड़ रहा है। खरीफ सीजन शुरू हो चुका है और किसान खेती की तैयारियों में जुटे हुए हैं। ऐसे समय में यदि आवश्यक संसाधन समय पर नहीं मिले तो खेती प्रभावित होना तय माना जा रहा है। किसानों को डर है कि यदि समस्या का समाधान जल्द नहीं हुआ तो इसका असर उनकी फसल और आर्थिक स्थिति दोनों पर पड़ेगा।

वनांचल क्षेत्र के किसानों का कहना है कि पहले ही दूरस्थ क्षेत्रों में रहने के कारण उन्हें कई प्रशासनिक और तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अब एग्रीस्टेक से जुड़ी समस्या ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है। किसानों के अनुसार, शासन द्वारा चलाई जा रही कई योजनाओं का लाभ अब डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर दिया जा रहा है। ऐसे में यदि रिकॉर्ड में ही त्रुटि रहेगी तो पात्र किसान भी लाभ से वंचित हो जाएंगे।

समस्या को लेकर किसानों ने सामूहिक रूप से प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। किसानों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को आवेदन सौंपकर भूमि अभिलेखों की जांच और आवश्यक सुधार की मांग की है। आवेदन में कहा गया है कि रिकॉर्ड में सुधार कर सभी पात्र किसानों का नाम एग्रीस्टेक पोर्टल में जोड़ा जाए ताकि वे शासन की योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।

ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या केवल कुछ किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि 112 वन ग्रामों के हजारों किसान किसी न किसी रूप में इससे प्रभावित हैं। यही कारण है कि अब यह मुद्दा पूरे वनांचल क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुका है। किसानों को उम्मीद है कि प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द आवश्यक कार्रवाई करेगा।

किसानों का यह भी कहना है कि खेती उनके जीवन और आजीविका का मुख्य आधार है। यदि समय पर खाद, बीज और ऋण नहीं मिला तो आने वाले महीनों में आर्थिक संकट गहरा सकता है। वन ग्रामों में रहने वाले अधिकांश परिवार कृषि पर निर्भर हैं और फसल उत्पादन प्रभावित होने का सीधा असर उनके जीवन पर पड़ेगा।

वहीं क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो प्रभावित किसान बड़े स्तर पर आंदोलन की राह भी अपना सकते हैं। फिलहाल किसान प्रशासन से सकारात्मक पहल और त्वरित कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 112 वन ग्रामों के किसानों की यह समस्या कब तक दूर होगी? क्या प्रशासन रिकॉर्ड की गड़बड़ियों को सुधारकर किसानों को राहत दिला पाएगा, या फिर हजारों किसानों को योजनाओं के लाभ के लिए और इंतजार करना पड़ेगा? इसका जवाब आने वाले दिनों में प्रशासनिक कार्रवाई से ही स्पष्ट हो पाएगा।

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