नगरी-सिहावा क्षेत्र की बेटी गायत्री को मिली अनुकंपा नियुक्ति, पिता के निधन के तीन माह के भीतर मिला रोजगार का सहारा

थरूण निषाद

धमतरी _मानवीय संवेदनशीलता और त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई का परिचय देते हुए जिला पंचायत धमतरी ने पंचायत सचिव के आकस्मिक निधन के तीन माह से भी कम समय के भीतर उनकी पुत्री को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान कर दी। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयंत नाहटा ने स्वर्गीय भूपेन्द्र देवांगन की पुत्री सुश्री गायत्री देवांगन को पंचायत सचिव (कर्मी) पद का नियुक्ति आदेश सौंपा।

स्वर्गीय भूपेन्द्र देवांगन जनपद पंचायत नगरी अंतर्गत ग्राम पंचायत खम्हरिया में पंचायत सचिव के पद पर कार्यरत थे। उनका 04 मई 2026 को आकस्मिक निधन हो गया था। उनके निधन के बाद परिवार के सामने उत्पन्न आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रचलित नियमों और शासन के निर्देशों के तहत उनकी पुत्री गायत्री देवांगन को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की गई।

जिला पंचायत कार्यालय में आयोजित संक्षिप्त कार्यक्रम में सीईओ जयंत नाहटा ने गायत्री देवांगन को नियुक्ति आदेश प्रदान किया। उन्हें दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर अस्थायी रूप से जनपद पंचायत नगरी में पदस्थ किया गया है।

नियुक्ति के बाद गायत्री देवांगन को दो माह की उन्मुखीकरण अवधि के दौरान जनपद पंचायत नगरी में कार्य करने का अवसर मिलेगा। इस दौरान वे पंचायत सचिव के दायित्वों, पंचायतों के प्रशासनिक कार्यों तथा ग्रामीण विकास से जुड़ी विभिन्न शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया को समझेंगी। उन्मुखीकरण अवधि पूरी होने के बाद रिक्त ग्राम पंचायतों के प्रस्ताव के आधार पर उनकी नियमित पदस्थापना की जाएगी।

नियुक्ति आदेश के अनुसार उन्हें पांच दिवस के भीतर अनिवार्य रूप से कार्यभार ग्रहण करना होगा। परिवीक्षा अवधि के दौरान उनके कार्य, व्यवहार एवं आचरण का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा तथा नियुक्ति शासन द्वारा निर्धारित सेवा शर्तों एवं नियमों के अधीन रहेगी।

इस अवसर पर जिला पंचायत के जिला लेखाधिकारी चंदन टंडन एवं उपसंचालक पंचायत नकुल प्रसाद वर्मा भी उपस्थित थे।

पिता के निधन के बाद बेहद कम समय में अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने से परिवार को आर्थिक संबल मिलने की उम्मीद है। शासन की इस संवेदनशील व्यवस्था के माध्यम से दिवंगत शासकीय कर्मचारी के परिवार के एक सदस्य को रोजगार का अवसर प्रदान कर परिवार को कठिन परिस्थितियों में सहारा देने का प्रयास किया जाता है।

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