नगरी/धमतरी। 10 साल से अधिक समय से गंभीर बीमारी के चलते बिस्तर पर जीवन गुजार रहे शशिकांत भरत ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, कलेक्टर और विधायक से अपने इलाज की व्यवस्था कराने की मार्मिक अपील की है। उन्होंने कहा है कि जिस अस्पताल में उनका इलाज संभव है, उन्हें वहां ले जाकर उपचार की व्यवस्था कराई जाए, ताकि वे सामान्य जीवन की ओर लौटने की उम्मीद कर सकें।
शशिकांत भरत ने बताया कि वे अपने माता-पिता के इकलौते बेटे हैं और कभी विद्यार्थी के रूप में धमतरी भटगांव आईटीआई में कंप्यूटर प्रशिक्षण की पढ़ाई कर रहे थे। 11 नवंबर 2016 को जेठोनी त्योहार की छुट्टी में घर लौटते समय दुगली-गचकन्हार के पास उनके साथ एक गंभीर दुर्घटना हो गई। इस घटना के बाद उनका पूरा शरीर लकवाग्रस्त हो गया। चिकित्सकों के अनुसार उन्हें सर्वाइकल इंजरी हुई है।
शशिकांत का कहना है कि दुर्घटना के बाद से वे लगातार बिस्तर पर हैं और पिछले करीब 10 वर्षों से बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन जी रहे हैं। उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी समस्या बताने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के कारण मुलाकात नहीं हो सकी।
उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान भी उन्होंने भेंट-मुलाकात कार्यक्रम में अपनी समस्या रखने का प्रयास किया था। वहीं 10 अगस्त 2026 को विधायक भवन, तहसील नगरी में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पहुंचने पर शशिकांत ने उनसे मुलाकात कर अपनी समस्या बताई और अपना आवेदन सौंपा।
शशिकांत ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, कलेक्टर अविनाश मिश्रा और विधायक अंबिका मरकाम से विशेष हस्तक्षेप करते हुए अपने इलाज की समुचित व्यवस्था कराने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार उनके इलाज की व्यवस्था कराती है तो उनके लिए यह जिंदगी की सबसे बड़ी मदद होगी। उनका कहना है कि वे अपने माता-पिता के इकलौते बेटे हैं और वर्षों से बिस्तर पर पड़े रहने के कारण शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेल रहे हैं।
शशिकांत ने समाज के लोगों से भी भावुक अपील करते हुए कहा कि “अगर समाज में इतनी शक्ति और सामर्थ्य है, तो मेरे इलाज के लिए शासन-प्रशासन तक मेरी आवाज पहुंचाकर मेरी मदद करके दिखाइए।”
उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द मानवीय आधार पर उनकी स्थिति का संज्ञान लेने, विशेषज्ञ चिकित्सकों से जांच कराने तथा जिस अस्पताल में उनका उपचार संभव है, वहां तक पहुंचाकर निःशुल्क अथवा सरकारी सहायता से इलाज की व्यवस्था कराने की मांग की है।
शशिकांत का कहना है कि उन्हें किसी राजनीतिक लाभ की नहीं, बल्कि इलाज और बेहतर जीवन जीने के एक अवसर की जरूरत है।

