नगरी। धमतरी जिले के नगरी विकासखंड में नदियों और नालों से रेत के कथित अवैध उत्खनन का मामला एक बार फिर चर्चा में है। सीतानदी और महानदी सहित क्षेत्र के विभिन्न नदी-नालों से रेत निकालने की गतिविधियों को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विशेष रूप से बेलर क्षेत्र में सीतानदी से दिनदहाड़े ट्रैक्टरों के माध्यम से रेत निकाले जाने की बात सामने आई है। इससे खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, बेलर से कांकेर जाने वाले मार्ग पर स्थित सीतानदी में कथित तौर पर बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों के माध्यम से रेत निकाली जा रही है। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के मुताबिक, नदी में एक साथ 10 से 12 ट्रैक्टरों से रेत निकाले जाने की स्थिति देखी गई। यदि यह गतिविधि बिना वैध अनुमति के संचालित हो रही है, तो यह खनिज नियमों के उल्लंघन का मामला हो सकता है।
कृषि कार्य के ट्रैक्टरों के उपयोग पर भी सवाल
क्षेत्र में कृषि कार्य के लिए उपयोग किए जाने वाले ट्रैक्टरों से रेत परिवहन किए जाने की बात भी सामने आ रही है। हालांकि, संबंधित वाहनों के पंजीकरण, परमिट और उपयोग की वास्तविक स्थिति की जांच आवश्यक है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि रेत का उत्खनन और परिवहन निर्धारित नियमों के अनुरूप ही हो रहा है या नहीं।
कार्रवाई के बावजूद क्यों नहीं रुक रहा उत्खनन?
स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी-नालों से रेत निकालने की गतिविधियां सुबह से शाम तक दिखाई देती हैं। इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। लोगों के अनुसार, कभी-कभार कुछ ट्रैक्टरों पर कार्रवाई किए जाने की जानकारी मिलती है, लेकिन इसके बाद भी कथित अवैध उत्खनन पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है।
ग्रामीणों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि नदी से रेत निकालने का काम वैध अनुमति के बिना किया जा रहा है, तो संबंधित विभाग नियमित जांच और निगरानी क्यों नहीं कर रहा है? हालांकि, अधिकारियों की मिलीभगत या किसी प्रकार के लेन-देन के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे आरोपों की जांच संबंधित विभाग द्वारा की जानी चाहिए।
रेत से भरे वाहनों से सड़कों को नुकसान की आशंका
नदी से रेत भरकर लगातार दौड़ने वाले भारी वाहनों के कारण ग्रामीण सड़कों पर दबाव बढ़ने और सड़कें क्षतिग्रस्त होने की आशंका भी जताई जा रही है। यदि नियमों के विरुद्ध भारी वाहनों का आवागमन हो रहा है, तो इसका असर सड़क सुरक्षा और रखरखाव पर पड़ सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस पहलू पर भी ध्यान देना चाहिए।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी उठ रहे सवाल
सीतानदी और महानदी में कथित अवैध उत्खनन का मुद्दा केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं है। क्षेत्र के लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि इस मामले में जनप्रतिनिधियों और विपक्ष की ओर से प्रभावी पहल क्यों नहीं दिखाई दे रही है। क्या संबंधित अधिकारियों तक शिकायतें पहुंचाई गई हैं? क्या मामले को लेकर कोई औपचारिक आवेदन या आंदोलन किया गया है? इन सवालों का जवाब सामने आना अभी बाकी है।
प्रशासन से जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों की मांग है कि खनिज विभाग, राजस्व विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम बनाकर सीतानदी, महानदी तथा क्षेत्र के अन्य नदी-नालों का निरीक्षण कराया जाए। उत्खनन की अनुमति, रेत परिवहन में लगे वाहनों के दस्तावेज और निर्धारित नियमों की जांच की जाए। यदि अवैध उत्खनन की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और नदी-नालों से रेत के कथित अवैध उत्खनन पर रोक लगाने के लिए क्या कदम उठाता है। फिलहाल, क्षेत्र के लोगों को संबंधित विभाग की जांच और कार्रवाई का इंतजार है।

