श्री बुढ़ादेव को अर्पित किया गया नव अन्न का भोग, आदिवासी ध्रुव गोंड़ समाज ने निभाई परंपरा

क्वांर नवमी पर ग्राम करैहा स्थित श्री बुढ़ादेव मंदिर में पूजा-अर्चना कर समाजजनों ने किया नव अन्न ग्रहण

गट्टासिल्ली। आदिवासी ध्रुव गोंड़ समाज में अपनी पारंपरिक रीति-रिवाजों और आस्था के अनुरूप क्वांर नवमी के अवसर पर नव अन्न ग्रहण की परंपरा निभाई गई। इस अवसर पर समाज के लोग ग्राम करैहा स्थित श्री बुढ़ादेव मंदिर में एकत्रित हुए और अपने ईष्ट देवता श्री बुढ़ादेव की पूजा-अर्चना कर नई फसल से तैयार अन्न का भोग अर्पित किया।

समाज की परंपरा के अनुसार, नई फसल के अन्न का सेवन करने से पहले उसे सर्वप्रथम अपने ईष्ट देवी-देवताओं को समर्पित किया जाता है। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए समाजजनों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और श्री बुढ़ादेव को नव अन्न का भोग लगाया। इसके पश्चात सभी ने एक साथ बैठकर परंपरागत रीति से नया अन्न ग्रहण किया।

इस अवसर पर रामूसिग तारम, किस कुमार मारकोले, तुलाराम मण्डावी, कान्ता कुंजाम, श्यामाचरण मण्डावी, राधेलाल मण्डावी, द्वारिका प्रसाद नेताम, बल्दू राम मण्डावी, ईश्वर मण्डावी, सेवक राम मण्डावी, गौकरण मण्डावी, ईकलेश मण्डावी, पुरुषोत्तम कुंजाम, कृष्ण कुमार नेताम, शिवलाल मारकोले, बिरेंद्र सलाम, रामेश्वर नेताम, अनुप तारम, तुमेश कोर्राम, तामेश कुंजाम, जोहन नागवंशी, महादेव सलाम, सूरज ध्रुव, टेमेश कोर्राम एवं बिरेंद्र कोर्राम सहित अन्य सामाजिक जन उपस्थित रहे।

नव अन्न ग्रहण की यह परंपरा आदिवासी ध्रुव गोंड़ समाज की सांस्कृतिक विरासत, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, ईष्ट देवता के प्रति श्रद्धा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। ऐसी परंपराओं के माध्यम से समाज अपनी प्राचीन संस्कृति एवं रीति-रिवाजों को संरक्षित रखने के साथ-साथ नई पीढ़ी को भी अपनी सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने का संदेश दे रहा है।

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