SDM और पुलिस टीम घंटों करती रही जांच, सामाजिक बहिष्कार के चलते घर के पीछे दफनाया गया था शव
नगरी/बोरई।
बोरई थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम आमानारा में उस समय सनसनी फैल गई, जब गांव के एक खेत में ताजा कब्र होने की सूचना ग्रामीणों द्वारा पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया और मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के साथ-साथ प्रशासनिक अमला भी तत्काल मौके पर पहुंचा। जांच टीम में एसडीएम सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे, जिन्होंने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया।
ग्रामीणों के अनुसार खेत में बनी ताजा कब्र को देखकर उन्हें किसी अनहोनी की आशंका हुई, जिसके बाद तत्काल इसकी जानकारी पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची टीम ने जब जांच शुरू की तो यह पुष्टि हुई कि कब्र में एक महिला का शव दफन है। इस जानकारी के सामने आते ही पूरे गांव में भय और आशंका का माहौल बन गया।
मृतका की पहचान बिंदा बाई के रूप में की गई, जो बीते 30 मई से लापता बताई जा रही थी। लापता महिला का शव खेत में दफन मिलने की खबर से मामले ने और गंभीर रूप ले लिया और प्रारंभिक तौर पर हत्या या संदिग्ध मौत की आशंका जताई जाने लगी। ग्रामीणों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं और लोग घटना को लेकर चिंतित नजर आए।
हालांकि पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए हर पहलू पर जांच शुरू की। घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ-साथ मृतका के परिजनों से पूछताछ की गई और जिला अस्पताल से भी संबंधित रिकॉर्ड मंगवाए गए। जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने पूरे मामले की दिशा ही बदल दी।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की गई जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बिंदा बाई की तबीयत खराब होने के कारण उसे पहले जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान 30 मई को उसकी मृत्यु हो गई थी। अस्पताल के दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच के बाद यह पुष्टि हो गई कि महिला की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई थी और इसमें किसी भी प्रकार की आपराधिक घटना शामिल नहीं थी।
मामले की एक और अहम कड़ी तब सामने आई जब मृतका के परिजनों से पूछताछ की गई। जानकारी के अनुसार, मृतका का परिवार पिछले लगभग पांच वर्षों से गांव में सामाजिक बहिष्कार का सामना कर रहा है। बताया जाता है कि मृतका का पति दो पत्नियों के साथ रह रहा था, जिसके कारण गांव में उसे सामाजिक रूप से अलग-थलग कर दिया गया था।
इस सामाजिक बहिष्कार के चलते परिवार को पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसी वजह से मृतका के पति ने शव को गांव के बाहर ले जाने या सार्वजनिक रूप से अंतिम संस्कार करने के बजाय घर के पीछे स्थित अपनी बाड़ी में ही दफना दिया।
यह स्थिति न केवल सामाजिक विडंबना को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि सामाजिक बहिष्कार जैसे मुद्दे किस प्रकार परिवारों को अलग-थलग कर देते हैं और उन्हें परंपरागत व्यवस्थाओं से दूर कर देते हैं।
जिला अस्पताल के रिकॉर्ड, परिजनों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि मामले में हत्या या किसी भी प्रकार की आपराधिक साजिश के कोई संकेत नहीं मिले हैं। इसलिए शव को कब्र से बाहर निकालने की आवश्यकता नहीं समझी गई है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले का दस्तावेजी परीक्षण कर रही है और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें।


