धमतरी/नगरी। नगरी विकासखंड के ग्राम गजकन्हार के जंगल में सरई बीज संग्रह करने गई एक वृद्ध महिला की मधुमक्खियों के झुंड के हमले में दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। जंगलों पर आश्रित ग्रामीणों के लिए यह हादसा एक बड़ी चेतावनी बनकर सामने आया है। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल व्याप्त है, वहीं ग्रामीणों ने वन क्षेत्रों में सुरक्षा और जागरूकता बढ़ाने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार ग्राम पालगांव थाना दुगली निवासी रामबती (75 वर्ष) पति दामाराम पिछले लगभग एक सप्ताह से अपनी बेटी देवकुंवर के घर ग्राम गजकन्हार में रह रही थीं। सोमवार सुबह गांव के अन्य ग्रामीणों के साथ वह जंगल में सरई बीज बिनने गई थीं। सरई बीज संग्रहण का कार्य ग्रामीणों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है और इन दिनों बड़ी संख्या में ग्रामीण जंगलों का रुख कर रहे हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जंगल के भीतर कार्य के दौरान अचानक मधुमक्खियों का एक बड़ा झुंड सक्रिय हो गया और रामबती पर हमला कर दिया। देखते ही देखते सैकड़ों मधुमक्खियां उनके शरीर से चिपक गईं और लगातार डंक मारने लगीं। वृद्ध महिला अपनी जान बचाने का प्रयास करती रही, लेकिन उम्र अधिक होने और लगातार डंक लगने के कारण वह गंभीर रूप से घायल हो गईं।
घटना के समय उनके साथ मौजूद ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने किसी तरह साहस जुटाकर मधुमक्खियों को भगाने का प्रयास किया और रामबती को वहां से सुरक्षित निकालकर जंगल के बाहर लाया। इसके बाद तत्काल उन्हें नगरी शासकीय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार वृद्धा के शरीर पर बड़ी संख्या में मधुमक्खियों के डंक पाए गए थे। डंक के कारण उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। चिकित्सकों ने स्थिति को गंभीर देखते हुए बेहतर उपचार के लिए उन्हें जिला अस्पताल धमतरी रेफर कर दिया। परिजनों और ग्रामीणों को उम्मीद थी कि जिला अस्पताल में उनका जीवन बचाया जा सकेगा, लेकिन वहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
अस्पताल पुलिस चौकी से मिली जानकारी के अनुसार घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में मधुमक्खियों के हमले को ही मौत का कारण माना जा रहा है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
मृतका के पुत्र निनकू राम ने बताया कि उनकी माता केवल कुछ दिनों के लिए बेटी के घर आई हुई थीं और सोमवार सुबह गांव के लोगों के साथ सरई बीज बिनने जंगल गई थीं। किसी को अंदाजा नहीं था कि एक सामान्य दिन इतना बड़ा हादसा बन जाएगा। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
गौरतलब है कि धमतरी जिले सहित आदिवासी और वनांचल क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी आजीविका के लिए जंगलों पर निर्भर रहते हैं। तेंदूपत्ता, महुआ, सरई बीज, चार और अन्य वनोपज के संग्रहण के दौरान ग्रामीणों को अक्सर जंगली जानवरों, जहरीले जीव-जंतुओं और मधुमक्खियों के हमलों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम में मधुमक्खियां अधिक संवेदनशील हो जाती हैं और किसी भी प्रकार की हलचल या खतरे की आशंका होने पर झुंड बनाकर हमला कर सकती हैं।
स्थानीय ग्रामीणों ने मांग की है कि वन क्षेत्रों में वनोपज संग्रहण के दौरान सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। साथ ही वन विभाग और प्रशासन द्वारा ग्रामीणों को मधुमक्खियों एवं अन्य संभावित खतरों से बचाव के उपायों की जानकारी दी जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
रामबती की असामयिक मृत्यु ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जंगलों में जीवनयापन करने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए और अधिक प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। पूरे क्षेत्र में इस घटना को लेकर शोक और संवेदना का माहौल बना हुआ है।

