माताओं ने संतानों की दीर्घायु और खुशहाली के लिए रखा निर्जला व्रत
नगरी। नगर के श्री रामनगर वार्ड क्रमांक 3 में संतान की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना को लेकर कमरछठ (हलषष्ठी) पर्व श्रद्धा, उत्साह और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। पर्व को लेकर सुबह से ही मोहल्ले में उत्सव का माहौल रहा।
माताओं ने अपनी संतानों के कल्याण की कामना करते हुए पूरे दिन निर्जला उपवास रखा। दोपहर बाद महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की।
सगरी बनाकर की विधिवत पूजा
मोहल्ले की महिलाओं ने सामूहिक रूप से जमीन पर छोटी सगरी (कुंड) तैयार की। सगरी के चारों ओर बेर, पलाश, कांसी, महुआ और गूलर की डालियां स्थापित कर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान बलराम की विधि-विधान से पूजा की गई।
सुनी कमरछठ की छह पौराणिक कथाएं
पूजा के दौरान पंडितों एवं बुजुर्ग महिलाओं द्वारा कमरछठ से जुड़ी छह पौराणिक कथाओं का वाचन किया गया। व्रती महिलाओं ने श्रद्धापूर्वक कथा श्रवण कर अपनी संतानों के सुखी, स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की।
पारंपरिक भोग किया अर्पित
पूजा में पसहर चावल, छह प्रकार की भाजियां, महुआ के फल, दोना-पत्तल तथा भैंस के दूध और दही का नैवेद्य अर्पित किया गया। पर्व की परंपरा के अनुसार पसहर चावल ऐसे धान से तैयार किया जाता है, जिसकी खेती में हल का उपयोग नहीं किया जाता।
बच्चों को बांटे पारंपरिक लाटा और खिलौने
पूजा के बाद माताओं ने महुआ और भुने हुए अन्न से पारंपरिक प्रसाद ‘लाटा’ तैयार किया। बच्चों के लिए मिट्टी और कांसे के खिलौने सगरी में अर्पित किए गए। इसके बाद माताओं ने संतानों की पीठ पर पारंपरिक रूप से पोती देकर उन्हें आशीर्वाद दिया।
शाम को व्रती महिलाओं ने पसहर चावल और छह प्रकार की भाजियों से तैयार सात्विक भोजन ग्रहण कर अपना व्रत खोला। पूरे आयोजन के दौरान ‘जय हलधर’ के जयघोष और भक्ति गीतों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। आयोजन में श्री रामनगर वार्ड क्रमांक 3 की सभी महिलाओं की सक्रिय सहभागिता रही।

