ग्राम सभा की अनुमति के बिना गांव में प्रवेश पर रोक सहित विकास कार्यों को लेकर उठी आवाज
नगरी। जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों तथा सीतानदी-उदंती क्षेत्र के ग्रामीणों की विभिन्न समस्याओं को लेकर जल जंगल जमीन बचाओ संघर्ष समिति, सीतानदी उदंती की महत्वपूर्ण बैठक 5 अक्टूबर को जनपद पंचायत नगरी के सभाकक्ष में आयोजित की गई। बैठक में समिति से जुड़े पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अपनी विभिन्न मांगों और समस्याओं को प्रशासन के समक्ष रखा।
बैठक का प्रमुख मुद्दा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में ग्राम सभा की सहमति के बिना विभागीय गतिविधियों और प्रवेश को लेकर रहा। समिति ने पेसा कानून एवं वन अधिकार कानून के तहत ग्राम सभा के अधिकारों को सुनिश्चित करने की मांग उठाई। समिति का कहना है कि आदिवासी बहुल गांवों में किसी भी प्रकार की कार्रवाई अथवा विभागीय गतिविधि से पहले ग्राम सभा की सहमति और ग्रामीणों के अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।
समिति ने टाइगर रिजर्व के नाम पर गांवों के विकास कार्य प्रभावित नहीं होने देने की मांग भी रखी। ग्रामीणों ने सड़क, स्वास्थ्य, बिजली, पुल-पुलिया सहित मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाने तथा वनांचल क्षेत्रों में आवश्यक विकास कार्य सुनिश्चित करने की बात कही।
बैठक के दौरान आदिवासी समुदाय के जल, जंगल और जमीन से जुड़े संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों का संरक्षण करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। इसके साथ ही वन विभाग की कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों के साथ कथित अभद्र व्यवहार के मुद्दे पर भी समिति की ओर से नाराजगी व्यक्त करते हुए निंदा प्रस्ताव रखे जाने की बात कही गई।
समिति की ओर से अध्यक्ष सिरधन सोम, संरक्षक मनोज साक्षी, नरेश मांझी, रेवाराम देवदास, माखन सलाम, ईश्वरी नेताम, चंद्रकुमार अग्रवानी, पुरन मेश्राम, दैनिक मांडवी, लोविद मरकाम, सुरेश मरकाम, हिम्मत नेताम, उदय प्रजापति, बीरबल पदमाकर सहित बड़ी संख्या में प्रतिनिधि एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।
समिति ने कहा कि सीतानदी-उदंती क्षेत्र के ग्रामीणों के अधिकारों, मूलभूत सुविधाओं और ग्राम सभा की भूमिका से जुड़े मुद्दों को लेकर आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाई जाएगी। बैठक में ग्रामीणों ने क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन से सकारात्मक पहल की अपेक्षा जताई।

