मृत्यु भोज और नहावन-मुंडन जैसी कुप्रथाओं के विरोध में सतनामी समाज हरदीभाठा ने लिया महत्वपूर्ण निर्णय

नगरी। सतनामी समाज ग्राम हरदीभाठा, ब्लॉक नगरी, जिला धमतरी ने सामाजिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए मृत्यु भोज एवं नहावन-मुंडन जैसी प्रचलित कुप्रथाओं को समाप्त करने का निर्णय लिया है। समाज की बैठक में इस संबंध में सर्वसम्मति से महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।

समाज के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने कहा कि मृत्यु के बाद आयोजित होने वाले मृत्यु भोज तथा नहावन-मुंडन जैसी परंपराओं में परिवारों को अनावश्यक आर्थिक खर्च उठाना पड़ता है। विशेषकर गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवार सामाजिक दबाव के कारण अपनी आर्थिक क्षमता से अधिक खर्च करने और कई बार कर्ज लेने तक मजबूर हो जाते हैं।

बैठक में समाज ने इन कुप्रथाओं को समाप्त कर शिक्षा, जागरूकता, समानता और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। समाज के सदस्यों ने कहा कि सामाजिक परंपराओं के नाम पर होने वाले अनावश्यक खर्च को रोककर परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने तथा बच्चों की शिक्षा और भविष्य पर ध्यान देना आवश्यक है।

सतनामी समाज ने समाज के सभी लोगों से अपील की कि वे मृत्यु भोज एवं नहावन-मुंडन जैसी कुप्रथाओं का त्याग करें और सामाजिक एकता, शिक्षा एवं आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ें। समाज का मानना है कि यह निर्णय आने वाली पीढ़ी को रूढ़िवादी एवं अनावश्यक परंपराओं से मुक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

 

संदेश: “कुप्रथा छोड़ें, शिक्षा और जागरूकता अपनाएँ—समाज को प्रगतिशील बनाएँ।”

बैठक में उपस्थित पदाधिकारी एवं सदस्य:

अध्यक्ष खिलेश लहरे, सचिव परमानंद जोशी, उपाध्यक्ष विजय बंजारे, कोषाध्यक्ष विजय सोनवानी, अजय बंजारे, केजू सोनवानी, जागेश्वर लहरे, पुनारद डहरिया, भान सिंह लहरे, मेघनाथ जोशी, शिवचरण जोशी, संजय जोशी, चंदन बंजारे, नेहरू लहरे, रामदास लहरे, छबिलाल बंजारे, खेमलाल जोशी, चुम्मन कुर्रे सहित सतनामी समाज ग्राम हरदीभाठा के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

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