नगरी वन विभाग में MPT तालाब निर्माण पर भारी अनियमितता के आरोप, लाखों की राशि पर उठे सवाल

नगरी। निर्माण कार्यों में अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पहले भी चर्चा में रह चुका नगरी वन विभाग एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। इस बार मामला नगरी वन परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक 298 में निर्मित किए गए एमपीटी (MPT) तालाब से जुड़ा हुआ है, जहां निर्माण कार्य में भारी अनियमितता और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप सामने आ रहे हैं।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार उक्त तालाब निर्माण कार्य के लिए लगभग 4 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। शासन की मंशा के अनुरूप इस राशि से गुणवत्तापूर्ण तालाब निर्माण कर वन्यजीवों एवं पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया जाना था, लेकिन मौके की स्थिति कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

ग्रामीणों और क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि निर्माण स्थल का निरीक्षण करने पर ऐसा प्रतीत होता है कि कार्य में बेहद कम राशि खर्च की गई है। प्रत्यक्ष रूप से देखने पर निर्माण की गुणवत्ता और आकार को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि कार्य में महज 40 से 50 हजार रुपये तक ही खर्च किए गए होंगे। हालांकि वास्तविक खर्च और भुगतान की पुष्टि विभागीय अभिलेखों एवं तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।

आरोप है कि तालाब निर्माण में स्वीकृत इस्टीमेट, ड्राइंग एवं डिजाइन का समुचित पालन नहीं किया गया। निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों की अनदेखी कर जल्दबाजी और लापरवाही के साथ काम पूरा किया गया। कई स्थानों पर तकनीकी खामियां स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं, जिससे कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।

सूत्रों का दावा है कि इस निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता बरती गई है और स्वीकृत राशि का अधिकांश हिस्सा कागजों में खर्च दिखाकर बंदरबांट कर लिया गया है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह शासन की राशि के दुरुपयोग का गंभीर मामला साबित हो सकता है।

क्षेत्र के लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य से संबंधित सभी दस्तावेज, तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका (एमबी), भुगतान विवरण एवं कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र की जांच की जानी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि समय रहते इस मामले की उच्चस्तरीय जांच नहीं कराई गई तो भविष्य में भी इसी प्रकार के निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा और शासन की योजनाओं का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा, साथ ही इस निर्माण कार्य में वन परिक्षेत्र अधिकारी एवं तत्कालिक एसडीओ की जवाबदेही का भी जांच होनी चाहिए।

अब देखना होगा कि वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करते हैं या नहीं। फिलहाल कक्ष क्रमांक 298 में बने एमपीटी तालाब का मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग जांच के माध्यम से सच्चाई सामने आने का इंतजार कर रहे हैं।

(नोट: यह समाचार स्थानीय सूत्रों एवं प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। आरोपों की निष्पक्ष जांच एवं विभागीय पक्ष सामने आने के बाद तथ्य स्पष्ट हो सकेंगे

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