नगरी। खाद की कीमत और कथित अवैध परिवहन की खबर सामने आई… विभागीय जांच हुई… और फिर पत्रकार के खिलाफ थाने में शिकायत! नगरी-सिहावा क्षेत्र में सामने आए इस घटनाक्रम ने अब कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले को लेकर नगरी के पत्रकारों ने एसडीएम के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
पत्रकारों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से किसानों को शासकीय दर पर मिलने वाली यूरिया खाद की कथित रूप से अधिक कीमत पर बिक्री और खाद को अन्य राज्यों एवं जिलों की ओर भेजे जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इन मामलों को मीडिया के माध्यम से उठाया भी गया है, ताकि किसानों को निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध हो सके।
इसी कड़ी में घुरावड़ गांव के एक कृषि केंद्र से यूरिया खाद निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बेचे जाने की जानकारी सामने आने का दावा किया गया। इसके अलावा खाद को ओडिशा की ओर भेजे जाने की बात भी सामने आई। पत्रकार द्वारा मामले की खबर प्रकाशित किए जाने के बाद कृषि विभाग के अधिकारियों के कृषि केंद्र पहुंचने की जानकारी सामने आई।
कार्रवाई किस पर होनी थी, शिकायत किसके खिलाफ हुई?
यहीं से मामला और गंभीर हो गया। पत्रकारों का आरोप है कि कृषि केंद्र में जांच के बाद संचालक के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पत्रकार के खिलाफ सिहावा थाने में शिकायत किए जाने की स्थिति बनी। पत्रकारों ने सवाल उठाया कि यदि खाद की बिक्री निर्धारित दर से अधिक हुई थी, तो उसकी जांच और कार्रवाई होनी चाहिए थी; लेकिन खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकार के खिलाफ शिकायत क्यों की गई?
इसी मुद्दे को लेकर नगरी के पत्रकार एकजुट हुए और एसडीएम कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। पत्रकारों ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच केवल स्थानीय स्तर तक सीमित न रखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कराई जाए।
खाद की कीमत से लेकर परिवहन तक हो जांच
ज्ञापन में पत्रकारों ने मांग की है कि संबंधित कृषि केंद्र के खाद स्टॉक, बिक्री रजिस्टर, बिल, निर्धारित मूल्य, वास्तविक बिक्री दर और खाद के परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाए। साथ ही ओडिशा एवं बस्तर की ओर खाद भेजे जाने के आरोपों की भी जांच हो।
पत्रकारों ने यह भी मांग की कि पत्रकार के खिलाफ की गई शिकायत की पृष्ठभूमि और उसके तथ्यों की निष्पक्ष जांच हो, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शिकायत वास्तविक विवाद के कारण हुई या खबर प्रकाशित किए जाने के बाद दबाव बनाने के उद्देश्य से।
पत्रकार बोले—सवाल उठाना अपराध नहीं
ज्ञापन सौंपने पहुंचे पत्रकारों ने कहा कि मीडिया का काम क्षेत्र की समस्याओं और अनियमितताओं को सामने लाना है। यदि किसी मामले में खबर प्रकाशित होने के बाद पत्रकार पर ही शिकायत दर्ज कराने की स्थिति बनती है, तो यह स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए चिंता का विषय है।
पत्रकारों ने चेतावनी दी कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो आगे आंदोलन किया जाएगा।
कृषि विभाग का पक्ष अभी बाकी
मामले में जिला कृषि अधिकारी का पक्ष जानने के लिए दूरभाष से संपर्क किया गया। उन्होंने बैठक में होने की जानकारी देते हुए बाद में बात करने की बात कही। विभाग का विस्तृत पक्ष प्राप्त होने के बाद उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

