गरियाबंद में सुशासन तिहार के बीच अचानक टूटा कहर: विशाल पीपल का पेड़ गिरा, कुछ सेकंड में खुशियां बदलीं चीखों में

गरियाबंद।सुशासन तिहार का मंच सज चुका था… प्रशासनिक अमला तैयारियों में जुटा था… गांव के लोग उत्साह के साथ कार्यक्रम स्थल पहुंच रहे थे… लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही पलों में पूरा माहौल चीख-पुकार और अफरा-तफरी में बदल जाएगा।

गरियाबंद जिले के खरहरी गांव में बुधवार को आयोजित सुशासन तिहार शिविर के दौरान एक विशाल पीपल का पेड़ अचानक जड़ समेत उखड़कर गिर पड़ा। पेड़ गिरते ही कार्यक्रम स्थल पर भगदड़ मच गई। हर तरफ धूल का गुबार छा गया और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।

इस दर्दनाक हादसे में 2 मासूम बच्चों समेत कुल 7 लोग घायल हो गए। वहीं कार्यक्रम स्थल के पास खड़ा एक छोटा हाथी वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया और कार्यक्रम को तुरंत रोकना पड़ा।

एक पल पहले हंसी… अगले ही पल चीखें

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कार्यक्रम स्थल पर सुबह से तैयारियां चल रही थीं। टेंट लगाए जा रहे थे, भोजन बनाया जा रहा था और लोग कार्यक्रम को लेकर उत्साहित नजर आ रहे थे।

इसी बीच कुछ युवक विशाल पीपल के पेड़ पर चढ़ गए थे ताकि ऊपर से कार्यक्रम देख सकें। नीचे टेंट कर्मचारी, ग्रामीण और बच्चे मौजूद थे। तभी अचानक तेज आवाज के साथ वर्षों पुराना पेड़ हिलने लगा।

लोग कुछ समझ पाते उससे पहले ही विशाल पीपल का पेड़ जमीन पर आ गिरा।

पेड़ गिरते ही वहां मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। कुछ लोग पेड़ के नीचे दब गए, जबकि कई लोग घायल होकर जमीन पर तड़पने लगे।

“सब कुछ कुछ सेकंड में खत्म हो गया”

घटना को अपनी आंखों से देखने वाले ग्रामीणों का कहना है कि हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने तक का मौका नहीं मिला।

एक ग्रामीण ने बताया —

“पहले जोर की आवाज आई… फिर लोगों की चीखें सुनाई देने लगीं… हर तरफ धूल ही धूल थी… कोई बच्चे को ढूंढ रहा था, कोई घायल को उठाने में लगा था…”

घटना के बाद महिलाएं रोने लगीं और पूरा कार्यक्रम स्थल दहशत में बदल गया।

ग्रामीणों ने दिखाई बहादुरी

हादसे के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीण बिना अपनी परवाह किए राहत कार्य में जुट गए। किसी ने पेड़ की डालियां हटाईं तो किसी ने घायलों को उठाकर सुरक्षित जगह पहुंचाया।

टेंट कर्मचारियों और प्रशासनिक टीम ने मिलकर पेड़ के नीचे दबे लोगों को बाहर निकाला। कुछ घायलों के हाथ-पैर टूट गए, जबकि दो लोगों की हालत ज्यादा गंभीर बताई जा रही है।

घायलों को आनन-फानन में जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम इलाज में जुटी हुई है।

बड़ा हादसा टल गया

ग्रामीणों का कहना है कि यह हादसा उस समय हुआ जब कार्यक्रम पूरी तरह शुरू नहीं हुआ था। अगर पेड़ थोड़ी देर बाद गिरता तो वहां सैकड़ों लोगों की भीड़ मौजूद रहती।

लोगों का कहना है कि तब हालात बेहद भयावह हो सकते थे और कई लोगों की जान जा सकती थी।

घटना के बाद गांव में डर और सन्नाटा दोनों का माहौल है। लोग अब भी उस भयानक पल को याद कर सहम जा रहे हैं।

कलेक्टर ने तुरंत रोका कार्यक्रम

हादसे की जानकारी मिलते ही जिला कलेक्टर ने तुरंत सुशासन तिहार शिविर को स्थगित करने के निर्देश दिए।

प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर हालात संभाले। एंबुलेंस की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।

जिला अस्पताल के डॉक्टर डॉ. हरीश चौहान ने बताया कि कई घायलों को गंभीर चोटें आई हैं। कुछ मरीजों के हाथ और पैर में फ्रैक्चर है, जबकि दो घायलों को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया है।

अस्पताल पहुंचे कलेक्टर और एसपी

हादसे की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर और एसपी ने अपना तय कार्यक्रम रद्द कर दिया और सीधे जिला अस्पताल पहुंचे।

दोनों अधिकारियों ने घायलों और उनके परिजनों से मुलाकात की। डॉक्टरों से इलाज की जानकारी ली और हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।

काफी देर तक अधिकारी अस्पताल में मौजूद रहे और पूरे मामले की मॉनिटरिंग करते रहे।

फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुट गया है और पेड़ गिरने के असली कारणों की पड़ताल की जा रही है।

गांव में पसरा डर और बेचैनी

हादसे के बाद खरहरी गांव में उत्सव का माहौल पूरी तरह खत्म हो गया है। जहां कुछ समय पहले मंच सज रहा था, वहां अब टूटे टेंट, बिखरी कुर्सियां और दहशत का माहौल नजर आ रहा है।

लोगों की आंखों में अब भी उस हादसे की तस्वीर ताजा है…

और हर किसी की जुबान पर सिर्फ एक ही सवाल है —

“अगर पेड़ थोड़ी देर बाद गिरता… तो क्या होता?”

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