अब फिंगरप्रिंट से मिनटों में होगी अपराधियों की पहचान, धमतरी पुलिस ने सीखी हाईटेक जांच तकनीक

धमतरी। अपराध की दुनिया में तकनीक जितनी तेजी से बदल रही है, उतनी ही तेजी से पुलिस भी खुद को आधुनिक बना रही है। अब अपराधियों की पहचान केवल गवाहों या पारंपरिक जांच पद्धतियों पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि फिंगरप्रिंट की मदद से कुछ ही मिनटों में अपराधियों तक पहुंचना संभव होगा। इसी उद्देश्य को लेकर धमतरी पुलिस ने आधुनिक जांच प्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

पुलिस मुख्यालय नया रायपुर के निर्देशानुसार और पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार के मार्गदर्शन में पुलिस कार्यालय धमतरी में NAFIS (नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) एवं वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन विषय पर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में पुलिस मुख्यालय से आए फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट डीएसपी राकेश नरवरे ने जिले के अधिकारियों और कर्मचारियों को आधुनिक तकनीकों की बारीकियों से अवगत कराया।

कार्यशाला के दौरान अधिकारियों को बताया गया कि किसी भी अपराध स्थल पर मिलने वाले फिंगरप्रिंट कितने महत्वपूर्ण होते हैं और इन्हें किस प्रकार सुरक्षित रखकर जांच में उपयोग किया जाता है। विशेषज्ञों ने चांस प्रिंट संरक्षण, फिंगरप्रिंट डेवलपमेंट, अंगुली चिन्ह पर्णी तैयार करने और घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।

प्रशिक्षण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा NAFIS तकनीक रहा। इस तकनीक के माध्यम से किसी व्यक्ति के फिंगरप्रिंट को राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध रिकॉर्ड से ऑनलाइन मिलाया जा सकता है। यदि किसी अपराधी का रिकॉर्ड देश के किसी भी हिस्से में मौजूद है, तो कुछ ही समय में उसकी पहचान की जा सकती है। इससे जांच एजेंसियों को अपराधियों तक पहुंचने में पहले की तुलना में कहीं अधिक आसानी होगी।

डीएसपी राकेश नरवरे ने प्रशिक्षण के दौरान बताया कि पहले फिंगरप्रिंट मिलान की प्रक्रिया लंबी और समय लेने वाली होती थी, लेकिन NAFIS के आने से यह प्रक्रिया काफी तेज और सटीक हो गई है। अब डिजिटल माध्यम से फिंगरप्रिंट का विश्लेषण कर देशभर के डाटाबेस में मौजूद रिकॉर्ड से उसका मिलान किया जा सकता है। इससे न केवल अपराधियों की पहचान आसान होगी बल्कि फरार आरोपियों और अज्ञात व्यक्तियों की जानकारी जुटाने में भी मदद मिलेगी।

कार्यशाला में घटनास्थल निरीक्षण और फिंगरप्रिंट डेवलपमेंट का लाइव डेमो भी प्रस्तुत किया गया। अधिकारियों को दिखाया गया कि अपराध स्थल पर छोड़े गए अदृश्य फिंगरप्रिंट को किस प्रकार वैज्ञानिक तरीके से विकसित कर सुरक्षित किया जाता है। साथ ही यह भी बताया गया कि किसी भी प्रकार की लापरवाही महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट कर सकती है, इसलिए घटनास्थल पर पहुंचने वाले पुलिसकर्मियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।

पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक पुलिसिंग में वैज्ञानिक जांच सबसे प्रभावी हथियार है। उन्होंने सभी विवेचना अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे घटनास्थल से प्राप्त फिंगरप्रिंट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों का संरक्षण पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ करें। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित जांच से अपराधों का खुलासा तेजी से होगा और न्यायालय में दोषसिद्धि की संभावना भी बढ़ेगी।

एसपी ने यह भी कहा कि आज के समय में अपराध अनुसंधान केवल पारंपरिक तरीकों से संभव नहीं है। आधुनिक तकनीक, डिजिटल साक्ष्य और वैज्ञानिक जांच पद्धति को अपनाकर ही पुलिस अपराधियों तक शीघ्र पहुंच सकती है। इसलिए जिले के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को लगातार नई तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

कार्यशाला के दौरान उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने फिंगरप्रिंट तकनीक तथा NAFIS प्रणाली से जुड़े कई प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से समाधान किया गया। इससे उन्हें जांच प्रक्रिया में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को समझने और उनका समाधान खोजने का अवसर मिला।

इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र कुमार पाण्डेय, फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट डीएसपी राकेश नरवरे, डीसीबी प्रभारी सहित जिले के विभिन्न थाना एवं चौकी क्षेत्रों से नामांकित विवेचना अधिकारी मौजूद रहे।

धमतरी पुलिस का यह प्रयास आने वाले समय में अपराध जांच को और अधिक आधुनिक, सटीक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक साक्ष्यों के सहारे अब अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी की प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक तेज और मजबूत होने वाली है।

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