बेमेतरा। थान खमरिया निवासी संजय यादव वर्षों से जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता के लिए लगातार लोगों को प्रेरित करने का कार्य कर रहे हैं। बचपन में अपनी मां और गांव की महिलाओं को दूर-दूर से पानी लाने की परेशानी झेलते देखने का उनके मन पर गहरा प्रभाव पड़ा। उसी अनुभव ने उन्हें प्रकृति, जल संरक्षण और जनहित के मुद्दों के प्रति संवेदनशील बनाया।
संजय यादव बताते हैं कि उन्हें समाज सेवा और जागरूकता की प्रेरणा अपने माता-पिता श्री पकलू यादव और श्रीमती प्रमिला यादव से मिली है। उनके संस्कारों और मार्गदर्शन ने उन्हें समाज के लिए कुछ बेहतर करने की ताकत दी। यही वजह है कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सएप के माध्यम से लगातार लोगों को जल संरक्षण, पर्यावरण बचाने और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने कई सार्वजनिक स्थानों पर पानी की बर्बादी रोकने के लिए टोटियां लगवाईं, लेकिन कई जगह असामाजिक तत्वों द्वारा उन्हें तोड़ दिया गया या चोरी कर लिया गया। इसके बावजूद उनका अभियान नहीं रुका और वे लोगों से लगातार अपील कर रहे हैं कि सरकारी या सार्वजनिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाने के बजाय उनकी सुरक्षा करें।
संजय यादव का कहना है कि आज की पीढ़ी को पानी की असली कीमत समझने की जरूरत है। पानी का महत्व उनसे पूछिए जो आज भी तालाब, झिरिया और दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाकर अपने परिवार की जरूरतें पूरी करते हैं। विडंबना यह है कि लोग पेट्रोल के लिए लंबी कतारों में खड़े हो जाते हैं, लेकिन जल संकट जैसे गंभीर विषय पर खुलकर आवाज नहीं उठाते।
उन्होंने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर भी चिंता व्यक्त की। उनका मानना है कि युवा शक्ति यदि नशे से दूर रहकर समाज और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाए तो गांव, शहर और पूरा देश सकारात्मक बदलाव की ओर बढ़ सकता है।
संजय यादव ने नगरवासियों और आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि केवल स्वयं जागरूक होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि दूसरों को भी जागरूक करना जरूरी है। जल संरक्षण, वृक्षारोपण और पर्यावरण सुरक्षा को जनआंदोलन बनाने की आवश्यकता है।
संदेश
“जल है तो कल है, पेड़ हैं तो जीवन है। पानी और प्रकृति की रक्षा करना केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। खुद जागें और दूसरों को भी जगाएं।”


