वन भूमि पर कब्जे को लेकर बवाल: अतिक्रमण हटाने पहुंची वन विभाग की टीम को ग्रामीणों ने घेरा, जप्ती की मांग पर घंटों चला हंगामा

मोहम्मला-परसापानी के जंगल में बढ़ा तनाव, पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों के पहुंचने के बाद सामान्य हुए हालात

नगरी, धमतरी। धमतरी जिले के नगरी वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम मोहम्मला एवं परसापानी के मध्य स्थित वन क्षेत्र में मंगलवार को वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। अवैध कब्जा हटाने और जप्ती की कार्रवाई के लिए पहुंची वन विभाग की लगभग 20 सदस्यीय टीम को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। स्थिति उस समय और अधिक तनावपूर्ण हो गई, जब सैकड़ों ग्रामीणों ने अधिकारियों को मौके से वापस जाने से रोक दिया और स्पष्ट कहा कि जब तक अतिक्रमण में उपयोग किए गए ट्रैक्टरों और अन्य वाहनों को जब्त नहीं किया जाएगा, तब तक किसी भी अधिकारी को वापस नहीं जाने दिया जाएगा।

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पुलिस और राजस्व विभाग हरकत में आया। एसडीओपी नगरी, थाना नगरी, दुगली और सिहावा का पुलिस बल तथा तहसीलदार नगरी तत्काल मौके पर पहुंचे। अधिकारियों की समझाइश और नियमानुसार कार्रवाई के आश्वासन के बाद कई घंटे चले गतिरोध का अंत हुआ और वन विभाग की टीम सुरक्षित वापस लौट सकी।

वन विभाग के अनुसार, ग्राम परसापानी के ग्रामीणों ने सूचना दी थी कि वन परिक्षेत्र नगरी के बाँधा बीट के कक्ष क्रमांक 289 में पिछले लगभग दो वर्षों से कुछ लोगों द्वारा जंगल की कटाई कर वन भूमि पर अवैध रूप से खेती की जा रही है। मंगलवार को भी चार से पांच ट्रैक्टरों से वन भूमि की जुताई किए जाने की जानकारी मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और नियमानुसार जप्ती एवं अन्य वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ की।

कार्रवाई शुरू होते ही ग्राम मोहम्मला माल के लगभग 50 से 60 ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और वन विभाग की कार्रवाई का विरोध करने लगे। इसी बीच वन भूमि की जुताई कर रहे ट्रैक्टर चालक अपने वाहन लेकर मौके से फरार हो गए, जिससे तत्काल जप्ती की कार्रवाई अधूरी रह गई।

कुछ ही देर में ग्राम परसापानी एवं मोहम्मला रैयत के लगभग 100 से 120 महिला-पुरुष ग्रामीण घटनास्थल पर एकत्र हो गए। ग्रामीणों का कहना था कि वे वर्षों से इस जंगल की सुरक्षा करते आ रहे हैं, लेकिन पिछले दो वर्षों से लगातार वन भूमि पर अतिक्रमण कर खेती की जा रही है। उनका आरोप था कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से अतिक्रमण लगातार बढ़ता गया।

ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों से कहा कि यदि इस बार भी केवल औपचारिक कार्रवाई कर मामले को छोड़ दिया गया तो भविष्य में वन भूमि पर अवैध कब्जा और बढ़ जाएगा। इसी कारण उन्होंने अधिकारियों को तब तक जाने नहीं दिया, जब तक जप्ती की कार्रवाई का स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला।

मामले की गंभीरता को देखते हुए उप वनमंडलाधिकारी संजय रौतिया ने तत्काल वनमंडलाधिकारी धमतरी और एसडीओपी नगरी को सूचना दी। पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से विस्तृत चर्चा की तथा भरोसा दिलाया कि वन भूमि पर हुए अवैध अतिक्रमण, जंगल की कटाई और उसमें प्रयुक्त वाहनों के विरुद्ध वन अधिनियम के तहत नियमानुसार कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों के आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत हुए और वन विभाग की टीम को सुरक्षित वापस जाने दिया गया। इसके बाद क्षेत्र में स्थिति सामान्य हो गई।

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की जांच जारी है। वन भूमि पर अवैध कब्जा, जंगल की कटाई तथा अवैध खेती से जुड़े सभी तथ्यों की जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं प्रशासन ने कहा है कि क्षेत्र में कानून व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए वन क्षेत्र की लगातार निगरानी की जाएगी।

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