सिहावा/नगरी। धमतरी जिले के सिहावा निवासी संदीप शांडिल्य ने आस्था, संस्कृति और साहस का अनूठा परिचय देते हुए साइकिल से ओडिशा के श्रीजगन्नाथ पुरी पहुंचकर भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा में शामिल होकर दर्शन किए। उन्होंने बताया कि यह यात्रा केवल एक सफर नहीं, बल्कि वर्षों से मन में संजोई गई श्रद्धा और जिज्ञासा को पूरा करने का माध्यम थी।
संदीप शांडिल्य ने बताया कि बचपन से उन्होंने गांव के बुजुर्गों से भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की सदियों पुरानी परंपरा के बारे में सुना था। जगन्नाथ पुरी, जगदलपुर और उनके गृह क्षेत्र भीतररास (सिहावा) में भी वर्षों से रथ यात्रा की परंपरा निभाई जाती रही है। इसी ऐतिहासिक और धार्मिक परंपरा को करीब से देखने की इच्छा ने उन्हें साइकिल यात्रा के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान उन्हें विभिन्न क्षेत्रों की संस्कृति, बोली-भाषा और लोगों के रहन-सहन को करीब से जानने का अवसर मिला। उनका कहना है कि भारत की सांस्कृतिक विविधता ही उसकी सबसे बड़ी पहचान है। अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराओं और लोगों से मिलकर उन्हें जीवन के कई नए अनुभव प्राप्त हुए।
संदीप ने कहा, “जिस तरह सड़कों पर कहीं चढ़ाई होती है तो कहीं उतराई, उसी तरह जिंदगी में भी उतार-चढ़ाव आते हैं। ऐसी यात्राएं इंसान को धैर्य, संघर्ष और आत्मविश्वास का पाठ पढ़ाती हैं।”
उन्होंने बताया कि गांव के बुजुर्गों से उन्होंने यह भी सुना था कि बहुत पहले पन्ना महाराज भगवान जगन्नाथ की प्रतिमाएं लेकर भीतररास (सिहावा) आए थे। तभी से वहां रथ यात्रा की परंपरा चली आ रही है। इस ऐतिहासिक विरासत को अपनी आंखों से देखने की उनकी वर्षों पुरानी इच्छा इस यात्रा के साथ पूरी हुई।
यात्रा पूरी होने के बाद संदीप शांडिल्य ने भावुक होकर कहा, “शायद यह महाप्रभु जगन्नाथ का ही बुलावा था, तभी मैं इतनी दूर साइकिल से श्रीजगन्नाथ पुरी तक पहुंच सका।”
संदीप शांडिल्य की यह साइकिल यात्रा आस्था, साहस और भारतीय संस्कृति के प्रति समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई।

