ग्राम सभा का प्रस्ताव बना ढाल या वैध अनुमति का विकल्प? सांकरा के तालाब से मुरूम उत्खनन और परिवहन को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश
सांकरा/नगरी। नगरी विकासखंड के ग्राम पंचायत सांकरा में स्थित भोथली रोड के तालाब को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जिस तालाब में डूबने से अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है और जिसे ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत माना जाता है, उसी तालाब से इन दिनों बड़े पैमाने पर मुरूम उत्खनन और परिवहन किए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि तालाब से लगातार मुरूम निकाला जा रहा है, लेकिन उत्खनन के लिए आवश्यक विभागीय अनुमति और वैध दस्तावेजों को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है।
मामला तब और गंभीर हो गया जब इस संबंध में ग्राम पंचायत सांकरा के सरपंच नागेंद्र बोरझा ने स्वीकार किया कि ग्राम सभा का प्रस्ताव तो संबंधित ठेकेदार को दिया गया था, लेकिन ठेकेदार ने खनिज विभाग से अनुमति ली है या नहीं, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।
यह बयान पूरे मामले को नए मोड़ पर ले जाता है, क्योंकि यदि ग्राम पंचायत केवल प्रस्ताव देने तक सीमित रही और विभागीय अनुमति की पुष्टि नहीं की गई, तो सवाल उठता है कि आखिर तालाब में चल रहा उत्खनन किस आधार पर किया जा रहा है।
तालाब में चल रही मशीनें, दौड़ रहे हाईवा, फिर भी जिम्मेदार अनजान?
ग्रामीणों के अनुसार तालाब परिसर में चेन माउंटेन मशीन लगाकर मुरूम निकाला जा रहा है तथा कई हाईवा वाहनों के माध्यम से लगातार परिवहन भी किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गतिविधि कोई छिपी हुई नहीं बल्कि खुलेआम दिनभर चल रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब मौके पर मौजूद लोगों से अनुमति संबंधी दस्तावेज मांगे गए तो कोई वैध कागजात प्रस्तुत नहीं किए गए। इसके बजाय सरपंच से फोन पर बात कराने की बात कही गई। इससे यह सवाल और गहरा गया कि आखिर उत्खनन कार्य की वैधानिक स्थिति क्या है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि इतने बड़े स्तर पर मशीनों और भारी वाहनों के माध्यम से मुरूम निकाला जा रहा है, तो क्या राजस्व विभाग, खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं थी?
तीन मौतों का गवाह रहा है यह तालाब
भोथली रोड स्थित यह तालाब केवल जलस्रोत ही नहीं बल्कि कई दुखद घटनाओं का भी गवाह रहा है। ग्रामीणों के अनुसार इस तालाब में डूबने से पहले ही तीन लोगों की मौत हो चुकी है। तालाब पहले से ही काफी गहरा है और बरसात के दिनों में इसकी स्थिति और अधिक खतरनाक हो जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में यहां पचरी (रास्ता) का निर्माण भी कराया गया था, लेकिन तालाब की गहराई और जलभराव के कारण वह भी कई बार उपयोग योग्य नहीं रह पाती। ऐसे में अब मशीनों से लगातार खुदाई कर तालाब को और गहरा किया जाना भविष्य में किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि उत्खनन इसी तरह जारी रहा तो बरसात के समय तालाब और अधिक खतरनाक हो जाएगा तथा दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ जाएगी।
सरपंच का बयान बना चर्चा का विषय
मामले में जब ग्राम पंचायत सांकरा के सरपंच नागेंद्र बोरझा से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि ग्राम सभा में चर्चा के बाद प्रस्ताव पारित किया गया था और वह प्रस्ताव संबंधित ठेकेदार को दिया गया।
हालांकि जब उनसे पूछा गया कि क्या ठेकेदार ने खनिज विभाग से आवश्यक अनुमति प्राप्त की है, तो उनका जवाब था कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
सरपंच का यह बयान अब पूरे विवाद का केंद्र बन गया है। क्योंकि सामान्यतः ग्राम सभा का प्रस्ताव किसी कार्य के लिए अनुशंसा हो सकता है, लेकिन खनिज संसाधनों के उत्खनन के लिए विभागीय अनुमति और निर्धारित प्रक्रिया का पालन आवश्यक माना जाता है।
सचिव ने कहा- सड़क निर्माण के लिए दिया गया प्रस्ताव
ग्राम पंचायत सचिव मदन सेन ने बताया कि बांध के नीचे सड़क निर्माण कार्य के लिए मुरूम की आवश्यकता थी। इसी कारण ग्राम पंचायत और ग्राम सभा द्वारा प्रस्ताव तैयार कर राजस्व विभाग एवं खनिज विभाग को भेजा गया था।
हालांकि सचिव ने भी यह स्पष्ट नहीं किया कि संबंधित विभागों से अंतिम अनुमति प्राप्त हुई है या नहीं। इससे ग्रामीणों के मन में शंकाएं और बढ़ गई हैं।
एसडीएम बोलीं- मीडिया से मिली जानकारी
मामले में एसडीएम एवं तहसीलदार नगरी प्रीति दुर्गम का कहना है कि उन्हें तालाब में अवैध उत्खनन और परिवहन की जानकारी नहीं थी। मीडिया के माध्यम से जानकारी मिलने के बाद मामले की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में अवैध उत्खनन पाया जाता है तो जब्ती और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
एसडीएम का यह बयान भी कई सवाल खड़े करता है। ग्रामीण पूछ रहे हैं कि यदि दिनभर मशीनें चल रही थीं और हाईवा वाहन लगातार परिवहन कर रहे थे, तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?
ग्रामीणों ने उठाए राजस्व हानि के सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि यदि यह कार्य बिना विभागीय अनुमति के किया जा रहा है तो इससे शासन को राजस्व हानि हो सकती है। वहीं यदि अनुमति प्राप्त है तो उससे संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए ताकि विवाद समाप्त हो सके।
ग्रामीणों का कहना है कि छोटे स्तर पर मिट्टी या मुरूम परिवहन करने वालों पर तत्काल कार्रवाई हो जाती है, लेकिन यहां भारी मशीनों और कई वाहनों के माध्यम से बड़े पैमाने पर उत्खनन होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।
अब जांच पर टिकी निगाहें
सांकरा के तालाब में चल रहे मुरूम उत्खनन को लेकर अब पूरा मामला प्रशासनिक जांच की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक ओर ग्रामीण सुरक्षा, पर्यावरण और राजस्व हानि का मुद्दा उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायत का कहना है कि ग्राम सभा का प्रस्ताव दिया गया था।
सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है—क्या संबंधित ठेकेदार के पास खनिज विभाग की वैध अनुमति है? यदि है तो दस्तावेज सामने क्यों नहीं आए, और यदि नहीं है तो फिर इतने बड़े स्तर पर उत्खनन और परिवहन कैसे हो रहा था?
इन सवालों के जवाब प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएंगे, लेकिन फिलहाल सांकरा का यह तालाब एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है और ग्रामीण पूरे मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
