छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के दुधावा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत देवडोंगर के आश्रित ग्राम एकलावन से एक बेहद डरावनी और चिंता बढ़ाने वाली घटना सामने आई है। यहां एक खूंखार तेंदुए ने घर के आंगन में खेल रहे 7 वर्षीय मासूम बच्चे पर हमला कर दिया। इस घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार तेंदुए की गतिविधियां बढ़ रही हैं और अब गांव के भीतर तक लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ चुकी है।
मिली जानकारी के अनुसार ग्राम एकलावन निवासी मोतीलाल पटेल पिता जागेश्वर पटेल का 7 वर्षीय पुत्र राघव पटेल शुक्रवार को अपने घर के आंगन में खेल रहा था। शाम 4.30 का समय था और बच्चे धूल-मिट्टी में खेलते हुए पूरी तरह गंदे हो गए थे। इसके बाद राघव की मां ने उसे घर के आंगन में लगे बोर के पास नहाने के लिए भेज दिया। राघव अपने कुछ साथियों के साथ वहां नहा रहा था। कुछ देर बाद उसके साथी नहाकर अपने घर लौट गए, लेकिन राघव वहीं पानी से खेलते हुए अकेले नहाता रहा।
इधर उसकी मां घर से लगे झोपड़ीनुमा रसोई में खाना बना रही थी। खाना तैयार होने के बाद वह भोजन को घर के अंदर रखने चली गई। इसी दौरान घात लगाए बैठा एक तेंदुआ धीरे-धीरे दबे पांव घर के आंगन तक पहुंच गया। बताया जा रहा है कि तेंदुआ काफी देर से बच्चे पर नजर बनाए हुए था और हमला करने का मौका तलाश रहा था।
जैसे ही राघव की मां वापस बाहर आई, उसकी नजर अचानक अपने बेटे के पीछे खड़े तेंदुए पर पड़ी। यह खौफनाक दृश्य देखते ही मां की चीख निकल गई। उसने जोर से आवाज लगाई — “बेटा… तेरे पीछे तेंदुआ है… भाग!” मां की आवाज सुनते ही मासूम राघव घबराकर रोते हुए भागने लगा, लेकिन तभी तेंदुए ने उस पर झपट्टा मार दिया।
तेंदुए के पंजों का वार राघव के कूल्हे के पास लगा, जिससे वहां काफी गहरा घाव हो गया। बच्चे की दर्दनाक चीख और मां के शोर-शराबे को सुनकर राघव के पिता मोतीलाल पटेल दौड़ते हुए मौके पर पहुंचे। पिता को आता देख तेंदुआ कुछ देर के लिए घबराया और फिर जंगल की ओर भाग निकला। पिता की बहादुरी और समय पर पहुंचने से बच्चे की जान बच गई।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर तेंदुए का हमला थोड़ा और सटीक होता, तो बच्चा गंभीर रूप से घायल हो सकता था या उसकी जान भी जा सकती थी। घटना के बाद घायल राघव को तुरंत उपचार के लिए सारवंडी चिकित्सालय ले जाया गया, लेकिन वहां पर्याप्त इंजेक्शन और जरूरी दवाइयां उपलब्ध नहीं होने के कारण डॉक्टरों ने उसे सीधे सरोना रेफर कर दिया। बाद में सरोना अस्पताल में बच्चे का उपचार किया गया, जहां फिलहाल उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार कुछ दिनों पहले भी देवडोंगर क्षेत्र में दो अन्य बच्चों पर तेंदुए द्वारा हमला किए जाने की घटना सामने आ चुकी है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने पूरे इलाके में भय का माहौल बना दिया है। गांव के लोग अब अपने बच्चों को अकेले बाहर भेजने से डर रहे हैं। शाम ढलते ही गांव में सन्नाटा छा जाता है और लोग जल्दी घरों में बंद हो जा रहे हैं।
ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पहले भी तेंदुए की मौजूदगी की सूचना कई बार दी गई थी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अब स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि तेंदुआ सीधे घरों के आंगन तक पहुंचने लगा है।
गांव वालों ने वन विभाग और प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में तत्काल पिंजरा लगाया जाए, जंगल किनारे गश्त बढ़ाई जाए और गांव में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
दुधावा क्षेत्र की यह घटना एक बार फिर इंसान और वन्यजीव संघर्ष की गंभीर तस्वीर सामने ला रही है। जंगल से लगे गांवों में रहने वाले लोग अब हर पल डर के साए में जीने को मजबूर हैं। वहीं मासूम राघव की दर्दनाक चीखें और मां की बेबसी ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।


